उत्तर प्रदेशबस्ती

सचिवों द्वारा बिना डीएम की अनुमति भुगतान के मामले में DPRO की भूमिका पर उठ रहा सवाल

यदि बिना जिलाधिकारी की अनुमति के करोड़ों रुपये के भुगतान की शिकायत सही है, तो जिम्मेदार सचिवों पर विभागीय कार्रवाई कब की जाएगी?

प्रशासनिक सुस्ती या लीपापोती? परसरामपुर विकासखंड में बिना अनुमति करोड़ों के भुगतान पर सुलगते सवाल

​बस्ती जिले के परसरामपुर विकासखंड से एक गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है, जो प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद बिना जिलाधिकारी (DM) की अनुमति के करोड़ों रुपये के भुगतान किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। इस पूरे प्रकरण में जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) घनश्याम सागर की भूमिका को लेकर गंभीर संशय की स्थिति बनी हुई है।

​सवालों के घेरे में DPRO की कार्यशैली

  • मीडिया से दूरी: मामले की जानकारी लेने के लिए मीडिया टीम द्वारा पिछले दो दिनों से DPRO से संपर्क करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है, लेकिन आरोप है कि वह फोन रिसीव नहीं कर रहे हैं।
  • कार्रवाई पर चुप्पी: DPRO की ओर से परसरामपुर के खंड विकास अधिकारी (BDO) को नोटिस जारी किए जाने और BDO द्वारा उसका जवाब दिए जाने की बात सामने आई है, फिर भी संबंधित सचिवों के विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई की गई, यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
  • सेवानिवृत्ति की चर्चा: चर्चा यह भी है कि DPRO घनश्याम सागर अक्टूबर माह में सेवानिवृत्ति होने वाले हैं, जिसके चलते विभागीय मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं।
  • मामले को भटकाने का अंदेशा: सूत्रों के हवाले से यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि स्तर से परसरामपुर को दोबारा नोटिस जारी कर इस पूरे मामले को एक अलग दिशा देने की तैयारी की जा रही है।

​कठघरे में जिम्मेदार सचिव

​इस पूरे मामले में कई सचिवों के नाम सामने आ रहे हैं जिन पर बिना उच्चाधिकारी की अनुमति के वित्तीय लेनदेन करने के आरोप हैं।

  • नामजद सचिव: इस प्रकरण में राज मंगल दुबे, अभिषेक सोनी, अर्चना वर्मा, अजीत सिंह, आलोक कुमार दिवाकर, तौफीक खान और गिरजेश वर्मा समेत अन्य सचिवों पर कथित तौर पर बिना अनुमति भुगतान किए जाने का आरोप लगाया गया है।
  • भ्रष्टाचार के आरोप: हालांकि किसी भी मामले में लेन-देन या अवैध वसूली के आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

​निष्कर्ष और अनसुलझे सवाल

  • विभागीय कार्रवाई: यदि बिना जिलाधिकारी की अनुमति के करोड़ों रुपये के भुगतान की शिकायत सही है, तो जिम्मेदार सचिवों पर विभागीय कार्रवाई कब की जाएगी?
  • जांच और जवाबदेही: क्या इस पूरी भुगतान प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग की स्थिति में सख्त जिम्मेदारी तय होगी?
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